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Wednesday, July 31, 2019

Enterprising Endeavour of Later Day Arabs and Simplistic Spirituality of the Muslim Nation Has Distanced Them from the Higher Principles of Universal Islam

By Rashid Samnakay, New Age Islam 29 July 2019 The prime goal of enterprising fraudsters in all walks of life is to make easy money at the expense of their victims. The question of ethics, morality, conscience, scruples and such like fancy notions have no place in their endeavours, however small or large the scale of enterprise. Callousness, greed of one and ignorant sentimental attachments of the other lay at the heart of it all. Hence, cleverness of the Few can be measured by their success to Manipulate the Many. The cleverness of the few applies in religious matters as well, and their huge success in people being lead astray on large scale into believing contrary to what is commanded by their holy scripture is a common phenomenon. This submission therefore, will not be palatable to...

Jihad Does Not Mean War or Fighting; Urdu Translations Use Jihad and Qital in the Same Meaning Which Is Misleading

By S. Arshad, New Age Islam 31 July 2019 During the initial years of Islam, the holy prophet pbuh and his holy companions had to face resistance from the polytheists and Jews of Makkah. They had to suffer humiliation and torments at their hands. Despite all this they persevered on their faith and endured all the hardships. However, when the mischief and opposition from the Jews and the polytheists became unbearable and the prophet pbuh feared for life, he decided to migrate to Madina with his followers. But here too they faced stiff resistance and torments from the polytheists and Jews.  When the Muslims numerically became strong and the polytheists became hell bent on wiping out Muslims and Islam, they challenged Muslims to fight...

Human Rights in Islam-Part-2 इस्लाम में मानव अधिकार

कनीज़ फातमा, न्यू एज इस्लाम इंसानी जान के खून की हुरमत अल्लाह पाक का इरशाद है: مِنْ أَجْلِ ذَٰلِكَ كَتَبْنَا عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنَّهُ مَن قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍ فِي الْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَمِيعًا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَا أَحْيَا النَّاسَ جَمِيعًا ۚ وَلَقَدْ جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا بِالْبَيِّنَاتِ ثُمَّ إِنَّ كَثِيرًا مِّنْهُم بَعْدَ ذَٰلِكَ فِي الْأَرْضِ لَمُسْرِفُونَ ﴿٣:۵﴾ अनुवाद: इसी वजह से हमने बनी इस्राइल पर (नाज़िल की गई तौरात में यह आदेश) लिख दिया (था) कि जिसने किसी व्यक्ति को बिना किसास के या ज़मीन में फसाद (फैलाने अर्थात खूँ रेज़ी और डाका जनी आदि की सजा) के (बिना हक़) क़त्ल कर दिया तो गोया उसने (समाज के) सारे लोगों को कत्ल कर दिया और जिसने उसे (नाहक मरने से बचा कर) जीवित रखा तो गोया उसने (समाज के) सारे लोगों को जीवित रखा (अर्थात उसने...

Meaning of the terms Spirit and Throne in the Quran कुरआन में अर्श, रूह और कुर्सी का मफहूम

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम कुरआन और दोसरे सभी आसमानी सहिफों में खुदा को निरंकार, बेमाहीत और लतीफ कहा गया हैl उसकी ज़ात को ना देखा जा सकता है, ना अंदाजा किया जा सकता है और ना उसे अक्ल पा सकती हैl उसे किसी भी माद्दी सूरत से पहचाना नहीं जा सकताl मगर इसके साथ ही साथ कुरआन यह भी कहता है कि वह सुनने, देखने, तदबीर करने और तखलीक करने और तबाह करने की सलाहियत रखता हैl इसी लिए कुरआन खुदा के संबंध में कहता है कि فطرت اللہ التی فطرنا الناس علیہا अल्लाह की फितरत वही है जिस पर उसने इंसान को बनाया (अल रूम:३०) कुरआन को खुदा ने आँख, कान, नाक, हाथ और अक्ल दी जिसकी मदद से वह महसूस करता है, दोसरे जरूरी कार्य अंजाम देता है और गौर व फ़िक्र करता हैl मगर उसका देखना, उसका महसूस करना अंगों का कृतज्ञ है जबकि खुदा का देखना, सोचना, महसूस करना और बोलना अंगों का कृतज्ञ...

Jihad does Not mean war or Fighting कुरआन के उर्दू अनुवादों में किताल और जिहाद को एक ही अर्थ में बयान किया गया है जो गुमराह करने वाले हैं

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम इस्लाम के शुरू के दिनों में पैगम्बरे इस्लाम और उनके अनुयायियों को मक्का के मुशरिकीन और यहूदियों से सख्त प्रतिरोध का सामना थाl कुफ्फार व मुशरिकीन के हाथों उन्हें काफी कष्ट और मुसीबतें उठानी पड़ींl इसके बावजूद वह ईमान पर कायम रहे और सभी तकलीफों को सब्र व रज़ा से बर्दाश्त कियाl फिर भी जब मुशरिकीन और यहूदियों की रेशा दवानियां हद से अधिक बढ़ गईं और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जान को खतरा हो गया तो उन्होंने मक्का से मदीना को हिजरत का फैसला कियाl और हज़रात मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने जां निसारों के साथ मदीना स्थानांतरित हो गएl मगर यहाँ भी उन्हें यहूदियों और मुशरिकीन की साजिशों का सामना करना पड़ाl यहाँ जब मुस्लिमों की संख्या अधिक हो गई और मुशरिकीन जब फैसला कुन जंग पर आमादा हो गए तो मुसलमानों ने जंग भी की और...

Ebrahim Moosa, Director of ‘Madrasa Discourses,’ Laments ‘McDonaldisation of Islamic Teachings’ In His Lecture at Jama’at-e-Islami Hind

New Age Islam Special Correspondent 26 July 2019   Ebrahim Moosa, Director of ‘Madrasa Discourses ------ Recently, the University of Notre Dame of Indiana launched an initiative called “Contending Modernities”, a cross-cultural research and education initiative examining the interaction among Catholic, Muslim, and other religious and secular forces in the world. Part of this global initiative is a 3-year experimental research project known as “Madrasa Discourses” focused on the modalities of reconciliation between the traditional Islamic thoughts and contemporary scientific and philosophical worldviews. In this program, graduates and young theologians of madrasas, mostly from India and Pakistan, are exposed to what...

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